Posted by Nalin Mehra on 1:53 AM

कर सकूँ बयां उसकी खूबसूरती यह मुमकिन नही ,
लिख दूँ कोई ग़ज़ल ऐसे शब्द मेरे पास नही ,
जब थामा हाथ मेरा उसने और नज़रों से नज़र मिली,
उस पल हुआ एहसास शायद है "प्यार" यही .............

नलिन

1 comments:

MUKESH JANGRA said...

pyar ki yah baten mujhe bahut achhi lagi

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